ED Action : ईडी ने DLF Camellias में 40 करोड़ रुपए का फ्लैट किया कुर्क, जानिए किसके नाम पर है ये लग्ज़री फ्लैट ?
ED ने जेनसोल ग्रुप से जुड़े गुरुग्राम के पॉश इलाके स्थित 'DLF कैमेलियाज़' (DLF Camellias) में एक लग्जरी अपार्टमेंट नंबर CM 706-A, जिसकी कीमत लगभग ₹40.57 करोड़ आंकी गई है

ED Action : प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) ने मनी लॉन्डरिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जेनसोल ग्रुप और ब्लूसमार्ट (BluSmart) के प्रोमोटर्स से जुड़ी ₹54.85 करोड़ की चल-अचल संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है ।
DLF में सबसे महंगे फ्लैट जब्त
ED ने जेनसोल ग्रुप से जुड़े गुरुग्राम के पॉश इलाके स्थित ‘DLF कैमेलियाज़’ (DLF Camellias) में एक लग्जरी अपार्टमेंट नंबर CM 706-A, जिसकी कीमत लगभग ₹40.57 करोड़ आंकी गई है । ये फ्लैट मेसर्स कैपब्रिज वेंचर्स एलएलपी के नाम पर रजिस्टर्ड है । इसको ईडी ने कुर्क कर लिया है । (Golf Course Road, Gurugram)

इतना ही नहीं ईडी ने जेनसोल ग्रुप की विभिन्न कंपनियों और कर्मचारियों के नाम पर खुले बेनामी खातों में मौजूद ₹14.28 करोड़ की बैंक बैलेंस को भी कुर्क कर लिया है ।
क्यों किए करोड़ो के फ्लैट कुर्क ?
दरअसल यह मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज की गई दो FIR पर आधारित है । जांच में सामने आया है कि जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड (Gensol Engineering Limited) और ब्लूसमार्ट फ्लीट प्राइवेट लिमिटेड (Blusmart Fleet Private Limited) के प्रोमोटर्स अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी ने अजय अग्रवाल गो ऑटो प्राइवेट लिमिटेड के प्रोमोटर के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची । (Flat Seized)

पैसे की हेराफेरी (Money Laundering) का तरीका :
ED का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बेड़े के विस्तार के नाम पर सार्वजनिक ऋणदाताओं (IREDA और PFC) और निजी संस्थानों (टोयोटा फाइनेंशियल सर्विसेज) से करोड़ों का कर्ज लिया गया । इन कर्जों को सीधे व्यावसायिक उपयोग में लाने के बजाय ‘गो ऑटो प्राइवेट लिमिटेड’ टाटा ईवी का अधिकृत डीलर के माध्यम से घुमाया गया। (Gurugram News)
ईडी ने जांच में पाया गया कि इस पैसे का इस्तेमाल जेनसोल समूह की अन्य गतिविधियों और प्रवर्तकों के व्यक्तिगत लाभ, जैसे कि गुरुग्राम में आलीशान अपार्टमेंट खरीदने के लिए किया गया ।

सरकारी एजेंसियों को हुआ नुकसान
ED के अनुसार, ऋण राशि के इस डायवर्जन के कारण जेनसोल के खाते ‘गैर-निष्पादित आस्तियों’ (NPA) में बदल गए । दिसंबर 2025 तक, जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड पर IREDA और PFC का कुल ₹505.27 करोड़ का बकाया है, जिससे सरकारी और निजी संस्थानों को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है । ED ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की संभावना है। (Enforcement Directorate)










